प्रमाण क्या है — जानिए

जब हम किसी बात को उचित या अनुचित मानते हैं, तो उसके पीछे कोई न कोई आधार अवश्य होता है। वह आधार प्रमाण कहलाता है। सरल शब्दों में कहें तो, प्रमाण वह साधन है जिससे हमें सच्चा और भरोसेमंद ज्ञान मिलता है।

प्रमाण की परिभाषा

प्रमाण वह साधन है जिसके द्वारा हम किसी वस्तु के बारे में सही और यथार्थ ज्ञान प्राप्त करते हैं।
संक्षेप में —
👉 प्रमाण = सत्य ज्ञान देने वाला साधन।


न्याय दर्शन में प्रमाण के प्रकार

न्याय दर्शन चार प्रकार के प्रमाणों को मान्यता देता है:

1. प्रत्यक्ष (Perception) – इन्द्रियों द्वारा प्रत्यक्ष अनुभव।

जैसे: आँखों से देखना, कानों से सुनना।



2. अनुमान (Inference) – तर्क द्वारा निष्कर्ष निकालना।

जैसे: धुएँ को देखकर आग का अनुमान लगाना।



3. उपमान (Comparison/Analogy) – किसी वस्तु को समानता के आधार पर जानना।

जैसे : किसी को पहले से बताया जाए कि “गाय के समान एक जानवर ‘गवय’ है” और बाद में देखने पर पहचानना।



4. शब्द (Verbal Testimony) – विश्वसनीय व्यक्ति या शास्त्र के वचनों से ज्ञान प्राप्त करना।

जैसे: वेदों का प्रमाण, गुरु का उपदेश।




महत्व

प्रमाण के बिना ज्ञान अधूरा और अविश्वसनीय होता है।

प्रमाण ही तय करता है कि कोई ज्ञान सही है या गलत।

न्याय दर्शन की पूरी चर्चा सत्य और असत्य ज्ञान को अलग करने पर आधारित है, और इसका पहला कदम प्रमाण की पहचान है।

1 thought on “प्रमाण क्या है — जानिए”

  1. आपकी इस वेबसाइट पर बहुत सुंदर ढंग से जानकारी दी गई है धन्यवाद।

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