मनुष्य का वास्तविक आभूषण उसका सदाचार है। धन, रूप या वैभव क्षणभंगुर हो सकते हैं, लेकिन अच्छे आचरण से प्राप्त की हुई प्रतिष्ठा और सम्मान कभी नष्ट नहीं होते। सदाचार का अर्थ है – सही मार्ग पर चलना, अच्छे विचार रखना, शुद्ध आचरण करना और दूसरों के साथ प्रेम, करुणा एवं ईमानदारी से व्यवहार करना।
सदाचार की परिभाषा
‘सत् + आचार = सदाचार’
यहाँ ‘सत्’ का अर्थ है – सत्य, शुद्ध, पवित्र और श्रेष्ठ।
और ‘आचार’ का अर्थ है – आचरण, व्यवहार या जीवन जीने का तरीका।
इस प्रकार, सदाचार का सीधा अर्थ है – सत्य और श्रेष्ठता से युक्त आचरण।
सदाचार के मुख्य लक्षण
1. सत्य बोलना – झूठ से बचना और ईमानदारी को अपनाना।
2. करुणा रखना – सब जीवों के प्रति दया और सहानुभूति रखना।
3. संयम – क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और अहंकार पर नियंत्रण रखना।
4. सादगी – दिखावे और आडंबर से दूर रहना, सरल जीवन जीना।
5. कर्तव्य पालन – अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्व निभाना।
सदाचार क्यों आवश्यक है?
सदाचार से मनुष्य का चरित्र उज्ज्वल होता है।
इससे समाज में प्रेम, शांति और विश्वास बना रहता है।
अच्छे आचरण वाला व्यक्ति कठिन समय में भी सबका प्रिय और सम्मानित रहता है।
सदाचार आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
निष्कर्ष
सदाचार मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। धन, यश और पद समय के साथ समाप्त हो सकते हैं, परंतु सदाचार से प्राप्त सम्मान और पुण्य अमर रहते हैं। जो व्यक्ति सदाचार को अपने जीवन में उतार लेता है, वही सच्चे अर्थों में महान कहलाता है।

