भारतीय दर्शन में ज्ञान प्राप्ति के छह प्रमुख साधन बताए गए हैं — जिन्हें षट् प्रमाण कहा जाता है।
इनमें दूसरा प्रमाण है — अनुमान प्रमाण।
अनुमान का अर्थ है विचार कर निष्कर्ष निकालना।
जब कोई तथ्य प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिखता,
फिर भी हम संकेतों या कारणों के आधार पर सत्य तक पहुँचते हैं,
तो वह ज्ञान अनुमान कहलाता है।
उदाहरण के लिए —
जब हम दूर से धुआँ उठता देखते हैं,
तो हम बिना आग देखे यह जान लेते हैं कि —
“वहाँ अवश्य आग लगी होगी।”
यह है अनुमान प्रमाण, अर्थात् सोच-समझकर प्राप्त किया गया ज्ञान।
🔹 तीन चरणों में अनुमान:
1. हेतु (कारण) — धुआँ दिखना।
2. व्याप्ति (संबंध) — जहाँ धुआँ होता है, वहाँ आग होती है।
3. निगमन (निष्कर्ष) — वहाँ आग अवश्य है।
आध्यात्मिक दृष्टि से भी अनुमान प्रमाण महत्वपूर्ण है,
क्योंकि यह हमें अनुभव से पहले समझ की दिशा देता है।
प्रत्यक्ष ज्ञान के बाद यह दूसरा सबसे विश्वसनीय प्रमाण माना गया है।

