व्यायाम के बारे में जानिए

(स्वस्थ शरीर और शांत मन का सहज मार्ग)

भारत की परंपरा में व्यायाम केवल शरीर को बलवान बनाने का साधन नहीं, बल्कि साधना का एक हिस्सा रहा है। शरीर को ईश्वर का मंदिर मानकर उसकी देखभाल को धर्म समझा गया है।

🌿 व्यायाम का अर्थ

‘व्यायाम’ का अर्थ है — शरीर के अंगों का व्यवस्थित और नियमित संचालन, जिससे रक्त-संचार सुधरे, शक्ति बढ़े, और मन प्रसन्न रहे।
आधुनिक समय में लोग जिम या मशीनों से शरीर बनाते हैं, परंतु प्राकृतिक व्यायाम ही सच्चा स्वास्थ्य देता है — जो प्रकृति, श्वास और संतुलन के साथ किया जाए।




💪 प्रमुख पारंपरिक व्यायाम और उनका परिचय

1. सूर्य नमस्कार

सूर्य को नमस्कार केवल प्रार्थना नहीं, बल्कि बारह आसनों का अद्भुत योग है। यह शरीर के प्रत्येक अंग को सक्रिय करता है, रक्त शुद्ध करता है और आलस्य दूर करता है।

> यह व्यायाम पूरे शरीर का संतुलन साधता है।



2. दण्ड-बैठक (Push-up & Squat का पारंपरिक रूप)

भारत के पहलवानों द्वारा किया जाने वाला यह व्यायाम अत्यंत उपयोगी है।
दण्ड से हाथ, कंधे और छाती मज़बूत होती है; बैठकों से पैर और कूल्हे स्वस्थ रहते हैं।

3. प्राणायाम

यह श्वास का व्यायाम है — शरीर को नहीं, श्वास को नियंत्रित करने का अभ्यास।
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति आदि प्राणायाम मन और शरीर दोनों को शुद्ध करते हैं।

4. चलना (विहार)

सुबह या सायंकाल का नियमित चलना सबसे सरल व्यायाम है।
यह रक्त-संचार सुधरता है, हृदय को शक्ति देता है और मन को शांति देता है।

5. आसन अभ्यास

योगासन जैसे — ताड़ासन, भुजंगासन, वज्रासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तानासन आदि शरीर को लचीला, सशक्त और स्थिर बनाते हैं।

> आसन से तन और मन दोनों संतुलित रहते हैं।



6. हस्त-मुद्राएँ और सूक्ष्म व्यायाम

बुजुर्गों या कार्यालय में बैठे रहने वालों के लिए हाथ, गर्दन और पैरों के सूक्ष्म व्यायाम अत्यंत उपयोगी हैं।
ये ऊर्जा प्रवाह को जागृत करते हैं और थकान घटाते हैं।




🌸 व्यायाम के लाभ

शरीर में स्फूर्ति और रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।

रक्त-संचार और पाचन सुधरता है।

नींद गहरी और मन शांत होता है।

आलस्य, चिंता, और नकारात्मकता दूर होती है।

आत्मविश्वास और प्रसन्नता में वृद्धि होती है।





☀️ अंत में

व्यायाम केवल शरीर को नहीं, जीवन को जागृत करता है।
जब तन स्वस्थ होता है तो मन भी स्थिर होता है, और यही साधना का प्रथम सोपान है।
इसलिए प्रतिदिन थोड़ा समय निकालिए — प्रकृति के साथ, श्वास के साथ, और अपने भीतर के जीवन-बल के साथ जुड़िए।

“शरीर स्वस्थ रहेगा, तो साधना सरल बनेगी।”

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