मौन केवल आत्म-विकास का साधन ही नहीं है, बल्कि यह जीवन की बड़ी-बड़ी समस्याओं से भी हमें बचा सकता है। कई बार परिस्थितियाँ ऐसी बन जाती हैं जहाँ सामने वाले लोग हमारे खिलाफ बोलते हैं, निंदा करते हैं या आलोचना करते हैं। ऐसी स्थिति में सामान्यतः व्यक्ति गुस्से में आकर बहस करता है, जिससे विवाद और बढ़ जाता है।
परंतु यदि हम मौन का पालन करें, तो:
विवाद बढ़ने से रुक जाता है – क्योंकि जब एक पक्ष चुप हो जाता है, तो झगड़ा स्वतः शांत होने लगता है।
मन की शांति बनी रहती है – अनावश्यक वाद-विवाद से बचकर हम अपनी ऊर्जा व्यर्थ नहीं करते।
सम्मान बढ़ता है – समाज में लोग उस व्यक्ति को परिपक्व मानते हैं जो हर बात का उत्तर गुस्से में न देकर धैर्य से देता है।
सच्चाई स्वयं सामने आती है – समय के साथ लोगों को समझ आ जाता है कि निंदा या आलोचना करने वाले गलत थे।
निंदा की स्थिति में क्या करें?
यदि चार लोग बैठकर आपकी बुराई या निंदा कर रहे हों, तो आपको क्या करना चाहिए?
1. मौन रखें – तुरंत प्रतिक्रिया न दें।
2. मुस्कुराकर टाल दें – इससे सामने वाले को लगेगा कि उसकी बातों का आप पर कोई असर नहीं हुआ।
3. मन में आत्म-चिंतन करें – सोचें कि कही गई बातों में से कुछ आपके सुधार के योग्य है या नहीं।
4. समय को उत्तर देने दें – अक्सर परिस्थितियाँ और कर्म ही सबसे बड़ा जवाब होते हैं।
👉 याद रखिए – मौन हमेशा कमजोरी नहीं है, बल्कि यह सबसे बड़ी ताकत है। जिस व्यक्ति ने मौन साध लिया, उसने जीवन की आधी समस्याओं पर विजय पा ली।

