उपमान प्रमाण क्या है – जानिए

उपमान” का अर्थ है उपमा या तुलना, और “प्रमाण” का अर्थ है सत्य या ज्ञान प्राप्त करने का साधन।
इसलिए —
➡️ उपमान प्रमाण वह साधन है जिससे हम किसी वस्तु को किसी अन्य वस्तु से तुलना करके उसका ज्ञान प्राप्त करते हैं।




📚 दार्शनिक परिभाषा:

न्याय दर्शन के अनुसार —

> “सादृश्यज्ञानं उपमानं।”
अर्थात् —
समानता (सादृश्य) के ज्ञान से किसी अज्ञात वस्तु का ज्ञान होना ही उपमान प्रमाण है।






🌿 सरल उदाहरण:

मान लीजिए —
किसी व्यक्ति ने कभी “गवय” (जंगली बैल) नहीं देखा।
किसी ज्ञानी ने उसे बताया —

> “गवय एक ऐसा पशु है जो गाय के समान दिखता है, परंतु वन में रहता है।”



अब जब वह व्यक्ति जंगल में जाकर गाय के समान एक पशु देखता है, तो उसे ज्ञान होता है कि —

> “यह वही गवय है।”



👉 यह ज्ञान “गाय से समानता” द्वारा प्राप्त हुआ,
इसलिए यह उपमान प्रमाण कहलाता है।




🧠 मुख्य बिंदु:

1. इसमें दो वस्तुओं में समानता (उपमा) के माध्यम से ज्ञान प्राप्त होता है।


2. यह ज्ञान श्रवण (किसी से सुनना) और दर्शन (स्वयं देखना) दोनों से जुड़ा होता है।


3. यह प्रमाण प्रत्यक्ष, अनुमान, और शब्द प्रमाण से अलग होता है।






⚖️ संक्षेप में:

तत्व विवरण

प्रमाण का नाम उपमान प्रमाण
अर्थ तुलना द्वारा ज्ञान
आधार सादृश्य (similarity)
उदाहरण गाय से मिलते-जुलते पशु को देखकर “गवय” पहचानना

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