भारतीय दर्शन में सत्य को जानने के कई साधन बताए गए हैं, जिन्हें “प्रमाण” कहा जाता है। प्रमाण का अर्थ होता है — सत्य ज्ञान प्राप्त करने का साधन।
इन प्रमाणों में से एक है “शब्द प्रमाण”, जो बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
🌿 शब्द प्रमाण का अर्थ
“शब्द प्रमाण” का अर्थ है — विश्वसनीय व्यक्ति के वचनों या कथनों से प्राप्त ज्ञान।
जब किसी ज्ञानी, ऋषि, गुरु या विश्वसनीय ग्रंथ से हमें कोई बात पता चलती है, और हम उस पर भरोसा करते हैं, तो वह ज्ञान शब्द प्रमाण कहलाता है।
जैसे —
> “स्वर्ग नाम का एक लोक है” — यह बात हमें किसी शास्त्र या गुरु से पता चलती है।
हमने स्वयं नहीं देखा, परन्तु गुरु या शास्त्र विश्वसनीय हैं, इसलिए हम मान लेते हैं। यही शब्द प्रमाण है।
🌸 उदाहरण से समझिए
मान लीजिए कोई व्यक्ति कभी हिमालय नहीं गया, पर किसी यात्री ने बताया —
> “हिमालय में बर्फ से ढकी ऊँची-ऊँची पर्वत चोटियाँ हैं।”
वह व्यक्ति उस यात्री पर विश्वास करता है, क्योंकि वह विश्वसनीय है।
यह विश्वास और उससे मिला ज्ञान शब्द प्रमाण के अंतर्गत आता है।
🔆 शब्द प्रमाण का महत्व
यह प्रमाण ज्ञान का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।
सभी धार्मिक ग्रंथ, जैसे — वेद, उपनिषद, गीता आदि, शब्द प्रमाण पर आधारित हैं।
इसके बिना आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना संभव नहीं है।
🌼 निष्कर्ष
शब्द प्रमाण हमें यह सिखाता है कि —
> “सत्य ज्ञान केवल देखने या अनुभव से ही नहीं, बल्कि विश्वसनीय वचन से भी प्राप्त होता है।”
अर्थात, गुरु वाणी और शास्त्र वचन स्वयं प्रमाण हैं, यदि वे विश्वसनीय हों।
इसी कारण कहा गया है —
> “श्रद्धा के साथ सुना गया सत्य वचन ही ज्ञान का द्वार खोलता है।”

