भारत की ऋषि परंपरा ने जीवन, आत्मा और सृष्टि के रहस्यों को समझने के लिए छह प्रमुख मार्ग बताए — जिन्हें षड्दर्शन कहा जाता है।
ये सभी दर्शन एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं — आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति।
1️⃣ सांख्य दर्शन – तत्वों का ज्ञान
महर्षि कपिल द्वारा प्रतिपादित यह दर्शन बताता है कि सृष्टि दो तत्वों से बनी है — पुरुष (चेतना) और प्रकृति (पदार्थ)।
इन दोनों का भेद जान लेना ही मुक्ति का मार्ग है।
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2️⃣ योग दर्शन – मन और आत्मा की एकता
महर्षि पतंजलि का यह दर्शन मनुष्य को अपने मन को नियंत्रित कर आत्मा से जुड़ना सिखाता है।
योग साधना के माध्यम से ईश्वर-साक्षात्कार संभव है।
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3️⃣ न्याय दर्शन – तर्क और प्रमाण का मार्ग
गौतम ऋषि ने सिखाया कि सच्चे ज्ञान की प्राप्ति तर्क, विवेक और प्रमाण के द्वारा होती है।
यह दर्शन बुद्धि को सत्य के मार्ग पर चलना सिखाता है।
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4️⃣ वैशेषिक दर्शन – पदार्थों का सूक्ष्म विज्ञान
कणाद ऋषि का यह दर्शन संसार को सूक्ष्म अणुओं (परमाणुओं) से बना मानता है।
यह सृष्टि के भौतिक नियमों को अध्यात्म से जोड़कर समझाता है।
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5️⃣ मीमांसा दर्शन – कर्म और धर्म का रहस्य
जैमिनि ऋषि के अनुसार मनुष्य के कर्म ही उसका भाग्य बनाते हैं।
यह दर्शन वेदों के कर्मकांडों और धर्म के पालन का महत्व समझाता है।
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6️⃣ वेदांत दर्शन – ब्रह्म ही परम सत्य
व्यास जी द्वारा प्रतिपादित यह दर्शन कहता है कि आत्मा और परमात्मा एक ही हैं।
जब मनुष्य इस अद्वैत सत्य को जान लेता है, तब मोक्ष प्राप्त होता है।
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✨ सार
छहों दर्शन मिलकर एक ही सत्य का उद्घाटन करते हैं —
जीवन का उद्देश्य आत्मज्ञान, शांति और मोक्ष की प्राप्ति है।
ये ही भारत की सनातन ज्ञान परंपरा के छह दिव्य दीपक हैं।

